जीवन के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी आधारित विकास को हम देख रहे हैं। किसी भी संगठन के लिए नवीनतम और भविष्योन्मुखी तकनीकी प्रगति के साथ कदमताल मिलाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अनुसंधान एवं विकास भविष्योन्मुखी तकनीकी प्रगति का वाहक है।
सैक में प्रायोजित अनुसंधान :
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत सैटकॉम, सैटनैव, रिमोट सेंसिंग, डेटा प्रोसेसिंग, मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम, क्वांटम फ्रंटियर इत्यादि क्षेत्रों में पेलोड विकास, डेटा प्रोसेसिंग और अनुप्रयोगों से संबंधित सैक गतिविधियों से संबंधित विशिष्ट विषयों अनुसंधान करता है। अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) देश भर में भौगोलिक रूप से स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी, आईआईएससी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय आदि के निरंतर समर्थन से इन अनुसंधान परियोजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है। सैक में यह कार्यक्रम एक गतिशील और मजबूती में विकसित हुआ है साथ ही यह इसरो के प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है ।
सैक के पास शिक्षाविदों से अनुसंधान अनुरोध के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण है।
अभिरुचि अन्वेषण बैठकें (आई. ई. एम. एस.) / अभिरुचि अन्वेषण वेबिनार (आई. ई. डब्ल्यू. एस.)
अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों के प्रति शिक्षाविदों को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में शिक्षाविदों के साथ अभिरुचि अन्वेषण बैठकें (आई. ई. एम. एस.) / अभिरुचि अन्वेषण वेबिनार (आई. ई. डब्ल्यू. एस.) आयोजित किए गए हैं। इन आई. ई. एम. एस. और आई. ई. डब्ल्यू. एस. के परिणामस्वरूप देश के पूर्व, उत्तर-पूर्व, उत्तर, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और मध्य क्षेत्रों में चल रही प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं का अच्छी तरह से वितरित भौगोलिक प्रसार हुआ है। संभावित नए प्रायोजित अनुसंधान प्रस्तावों के साथ हर साल सैक में चल रही प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की जाती है। पूर्ण प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं का मूल्यांकन पूरा होने के बाद किया जाता है और समूहवार प्रभाव मूल्यांकन भी किया जाता है।