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डॉ. ची. वें. नरसिंहा राव, विशिष्ट वैज्ञानिक
निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद
डॉ. ची. वें. एन. रावने 1989 में इलेक्ट्रॉनिकी और संचार इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूर्ण करने के बाद अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, (सैक), इसरो में कार्य ग्रहण किया।उन्होंने 2019 में डीएआईआईसीटी, गांधीनगर, गुजरात से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।उनके शोध योगदान में 150 से अधिक सहकर्मी समीक्षा प्रकाशन, 500 से अधिक उद्धरण और छह पेटेंट शामिल हैं।पिछले 37 वर्षों में, उन्होंने भारत के भू-प्रेक्षण और अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन नीतभार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इसरो के सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन संवेदन कार्यक्रम के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से वे एक हैं।
डॉ. राव कई अत्याधुनिक माइक्रोवेव नीतभार बनाने में मुख्य डिजाइनर और प्रमुख योगदानकर्ता रहे हैं, जिनमें आरआईसैट-1, ईओएस-04 और ईओएस-09 के लिए सी-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार शामिल हैं; ओशनसैट-2, स्कैटसैट-1, ईओएस-06 (ओशनसैट-3) और ओशनसैट-3ए के लिए केयू-बैंड स्कैटरोमीटर; आरआईसैट-2बी श्रृंखला नीतभार; चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 के लिए केए-बैंड अल्टीमीटर; और नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) मिशन शामिल हैं।उन्होंने उन्नत सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकियों में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एक दूरदर्शी प्रौद्योगिकीविद् और टीम लीडर के रूप में, डॉ. राव ने 2000-2008 के दौरान देश में पहली बार फ्लाइट मॉडल रेडियो फ्रिक्वेंसी हार्डवेयर में तकनीकी ज्ञान के हस्तांतरण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा अर्हता प्रदान करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने आत्मनिर्भरता को निरंतर प्रोत्साहित किया तथा कई प्रमुख स्वदेशीकरण गतिविधियों जैसे कि स्वदेशी गैस फाउंड्री, गेटेक, हैदराबाद से मोनोलिथिक माइक्रोवेव आई सी (एमएमआईसी) के निर्माण, एससीएल, चंडीगढ़ में स्वदेशी सीएमओएस फाउंड्री से अनुप्रयोग विशिष्ट आईसी (एएसआईसी) के विकास और भारतीय उद्योग में उड़ान मॉडल रेडियो आवृत्ति हार्डवेयर के विकास को प्रारंभ करने तथा उसका अनुवर्तन कर पेलोड में उन्हें नियोजित करने की शुरुआत को और आगे बढ़ाया।
डॉ. राव सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन, उपग्रह संचार, नौवहन प्रणाली, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, टेराहर्ट्ज़ प्रौद्योगिकियों आदि में उन्नत अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास का सफल नेतृत्व कर रहे हैं।उन्हें टीमों को तैयार करने, उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देने और नई प्रौद्योगिकियों और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
वे इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) के सदस्य, आईईईई के वरिष्ठ सदस्य और एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई), इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईएसआरएस) और इंडियन सोसाइटी ऑफ सिस्टम्स फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आईएसएसई) के आजीवन सदस्य हैं।
उन्होंने दिसंबर 2025 में अंतरिक्ष उपयोग केंद्र में सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) का दायित्व ग्रहण किया और 1 अगस्त 2026 से सैक के निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

